
बात कुछ दिन पहले की है लेकिन इस बात ने मुझे बहुत परेशान कर रखा है मेरी आंखों के सामने कुछ ग़लत हो रहा है और मेरी मजबूरी ये है कि मैं कुछ कर भी नहीं पा रही हूँ। बात ऐसी है कि पिछली सर्दी में मुझे Sinuses हो गया था। इस कारण मैं अपना काम भी नहीं कर पाती थी उन दिनों मेरी तकलीफ बढ़ती ही जा रही थी सो मैंने एक आंटी जी को काम करने के लिए लगा लिया था। उनका नाम संतोष है। संतोष आंटी जी को मैं जब ज्यादा नहीं जानती थी। लेकिन जब वो काम करने लगी तब वो अपने व अपने परिवार के बारे में अकसर बताती थी और अपनी परेशानिया भी बताया करती थी। अभी कुछ दिन पहले रोज कि तरह वो काम करने आई तो मुझे उनका चेहरा कुछ उतरा हुआ सा लगा। मैंने उनसे पूछ ही लिया कि क्या बात है आंटी जी...... क्या कोई परेशानी है?? मैं कुर्सी पर बैठी थी तब वो मेरे पास आकर बैठ गई। थोडी देर तो वो चुप रही............. फ़िर बोली आज मैं जिन्दा न होती। ये सुनकर मैं भी स्तब्ध रह गई। लेकिन फ़िर मैंने पूछा आख़िर ऐसी क्या बात हो गई जो आप ऐसा कह रही है। तो वो बोली अरे रश्मि क्या बताऊ तुम्हें तो पता ही है कि मेरा पति आयदिन शराब पीकर मुझे मारता है पर कल तो हद ही हो गई। कल उसने मुझे मारते हुए कहा कि तू घरों में काम करने नहीं जाती, क्या करने जाती है मुझे पता है। उसने मुझे बहुत गन्दी गन्दी गलियाँ दीऔर बहुत मारा। पर कल जो उसने कहा उसके बाद तो मेरा जीना ही बेकार है। इसलिए कल मैं फांसी लगाने जा रही थी, पर बच्चों ने बचा लिया। क्या करूँ इस तरह का इल्जाम कैसे सहूँ। वो तो कुछ काम करता नहीं है और बच्चों का पेट पालने के लिए मुझे घरों में काम तो करना ही पड़ता है। फ़िर वो चुप हो गई और रोने लगी............................ मैंने कुछ ठहर कर कहा आंटी जी आप परेशान न हो। कुछ करने से पहले इतना सोच लेना कि आपके बाद आपके बच्चों का क्या होगा। आपको तो एक बेटी भी है, उसे आपकी सबसे ज्यादा जरुरत होगी। और वैसे भी आपके मरने से आपके बच्चों कि जिन्दगी ही बर्बाद होगी आपके पति का तो कुछ भी नहीं जाएगा।
पर जबसे उन्होंने मुझे ये बताया तब से मैं बहुत ही परेशान हूँ। एक औरत जो अपनी पूरी जिन्दगी अपने पति को दे देती है। फ़िर भी उसके साथ ऐसा क्यों होता है................ न उसे सम्मान मिलता है और ना ही उसे चैन से दो वक्त कि रोटी। मैं उनकी मदद करती हूँ पर उन्हें उनके पति का प्रेम व सम्मान कहाँ से दिलाऊ। एक औरत होकर औरत कि मदद नहीं कर पाती हूँ मैं....................... ये कैसे पति है? ऐसे पतियों के लिए एक कविता......
ये कैसे पति है........................
कोई अपनी पत्नी को मारता है
कोई दे जाता है
सारी जिन्दगी का गम
और
कोई कर जाता है बेगाना
कोई सूरत छोड़
सीरत में खो जाता है
कोई अपना इल्जाम
औरत को ही दे जाता है
ये कैसे पति है..............................




14 comments:
अपने बहुत ही अच्छा लिखा है ......सुंदर भाव हैं......मन को छु गये हैं
नेट तुंरत चले जाने की वजह से कविता में गलती हो गई है. सूरत की जगह सीरत पढ़े व सीरत की जगह सूरत पढ़े.गलती के लिए क्षमा कीजिये.
रश्मि जी,
जबतक नारी ख़ुद अपनी शक्ति को पहचानेगी नहीं तबतक कुछ भृष्ट पुरूष ऐसा ही करते रहेंगे...
आज की नारी को जरुरत है. उसके खिलाफ उठी हर ग़लत आवाज के सामने डटकर खड़े होने की...
और ऐसे पुरूष अगर मेरे सामने आ जायें तो...
औरत को ख़ुद ही आगे आना होगा ...तभी कोई रास्ता निकलेगा ...मरना तो कोई उपाय है ही नहीं
पारिवारिक मुद्दों को जब तक राज्य के दायरे में नहीं लाया जाएगा, तब तक औरतें यूँ ही खरी-खोटी सुनने के लिए मजबूर रहेंगी।
ग़लत था ये, आप ने बिल्कुल सही समझाया. छोटे परिवारों में आज भी महिलाओं की स्थिति ख़राब है.
मार्मिक रचना!!
कितनी ही बार सुनाई देती है यह गाथा-हर बार बस एक घुटन का अहसास दे जाती है!! कोई हल नहीं. गरीबी, शिक्षा का आभाव...आदि आदि कितनी ही बातें हैं जिनके साथ यह समस्या दूर होगी! कब-न जाने कब!!
औरत तेरी यही कहानी...
ye bhut hi buri baat hai par pata nahi kyo aadamiyo ko ye samajh kyo nahi aata.
jab tak aurate khud aavaj nahi uthayegi tab tak koi kuch nahi kar sakta.
iske liye aurat ko svayam hi aage aana hoga. bhut badhiya kavita likhi hai. jari rhe.
औरतो को ख़ुद आगे आ के अपनी समस्याओ का समाधान खोजना होगा ..........मरना किसी भी समस्या का हल नही होता
एक औरत जो अपनी पूरी जिन्दगी अपने पति को दे देती है। फ़िर भी उसके साथ ऐसा क्यों होता है................ न उसे सम्मान मिलता है और ना ही उसे चैन से दो वक्त कि रोटी।
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यही समस्या है जब कोई औरत इस तरह अपनी क्षमताएं खोकर खुद को निरीह और लाचार बना लेती है तो पति के लिए बस वह एक रखैल की तरह हो जाती है आखिर वेश्या और ऐसी पत्नियों में क्या अंतर जो दो वक्त की रोटी के लिए पतियों की सारी बातें सहती रहती है, इससे अच्छी तो वेश्याएं होती हैं जो अपनी मर्जी से कूछ कर तो पाती है,इसलिए दिक्कत आप जैसी सोचवाली पत्नियों की हैं जो दो वक्त की रोटी के लिए पति के पावों पर पडी रहती हैं,औरत को अपना वजूद खुद खडा करना पडेगा किसी का पति इससे ज्यादा नहीं चाहेगा कि उसकी पत्नी बिना पैसे की रखैल की तरह उसकी गुलाम बनी रहे
,इसलिए दिक्कत आप जैसी सोचवाली पत्नियों की हैं जो दो वक्त की ....
अनाम की यह पंक्ति अपने कमेंट के बाकी हिस्से की सम्वेदना और आक्रोश की पवित्रता को घ्टा देती है।इससे बचा जा सकत था।
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