
जैसा कि मैं पहले ही उल्लेखित कर चुका हूँ कि मैं पर्यटन से जुडा हुआ हूँ। विदेशी पर्यटकों से मिलना, उन्हें भारत दर्शन कराना ही मेरा पेशा है। जहाँ तक मेरा ख्याल है कि ये संस्कृति, रीतिरिवाज तथा खानपान आदान प्रदान करने का सर्वोतम तरीका है। इस दौरान मैने पाया कि दूर देश से आये लोग भारत को अचंभित नजर से देखते है, और देखना भी लाजमी है। आख़िरभारत जैसी "विभिन्नता में एकता" शायद ही कहीं देखने को मिले। इसी काम के दौरान मेरी एक इंग्लैंड की पर्यटक से मुलाकात हुई। पूरा एक दिन मैं उसके साथ था। बातों-बातों में पता चला कि वो भारत पहले भी आ चुकी थी तथा बौद्ध धर्म की तरफ़ काफी आकर्षित थी। जब हम लोगों ने बातें शुरु की तो मैने पाया कि वो भारत में समस्त बौद्ध धर्मियों के बारे में पूरी जानकारी रखती है। यहाँ तक डाक्टर भीमराव अम्बेडकर के बारे में पूरी जानकारी थी। जिन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया था, तथा पिछड़ी जातियों के उत्थान मे कई कार्य किए ,जिन्हें सविंधान के रचियता के रूप मे जाना जाता है। इन बातों के दौरान मैने पाया उसे भारत की हर चीज से प्यार हैं ,उसे जाति, धर्म, ऊंच, नीच से कोई मतलब नहीं था। हर व्यक्ति को वह प्यार से देखती।
उसे देख मुझे काफी अच्छा लगा, काफी कुछ सीखने को मिला विदेशियों में बढ़ती भारतीय संस्कृति का आभास हुआ। मैं अब तक ४०० विदेशियों से रूबरू हो चुका हूँ। अधिकतर लोगों से बात कर यहीं लगा कि विदेशी भारत से योगा, शाकाहार, यहाँ के लोगों की मेहनत से प्रेरित हो रहे हैं, सीख ले रहें हैं। लग रहा है कि कई शताब्दियों पहले जो भारत की विश्व में "गुरु" की छवि थी उसी पथ पर भारत देश और भारतीय अग्रसर हो रहे है।
"मुझे मेरे भारतीय होने पर गर्व है।"




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