Thursday, May 29, 2008

वास्तविकता?????

हम ना जाने कितनी ही बार नेताओं ,गणमान्य व्यक्तियों के मुख से ,कितनी ही बार किताबों में राष्ट्र और राष्ट्रगान की महिमा सुन चुके है, कितनी ही बार स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस में इनकी महिमा भी देख चुके है। मगर न जाने क्यों इन आरक्षित दिनों के अलावा कोई राष्ट्रगान की परवाह नहीं करता।
बात जबकि है जब मैं विधि की पढ़ाई कर रही थी। रोज प्रातःकाल पाचं बजे ऊठकर घर की सफ़ाई के बाद स्नान कर मुझे मन्दिर जाना होता था, ताकि मैं अपनी कक्षा में समय से जा सकु। एक दिन रोज की तरह में मन्दिर जा रही थी। मन्दिर के सामने एक विद्यालय था। उस दिन मैं जैसे ही मन्दिर तक पहुँचने वाली थी कि अचानक उस विद्यालय में राष्ट्रगान शुरू हो गया। बच्चों राष्ट्रगान गाते सुन मैं अपने कदमों को और आगे नहीं बढा सकी, और वही सावधान कि स्थिति में खड़ी हो गई। क्योंकि हमें अपनें विद्यालय में सिखाया गया था कि भारत देश हमारा है, इसके गौरव का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। और जब राष्ट्रगान चल रहा था तों सड़क पर मेरे अलावा अन्य कोई भी ऐसा नहीं था जो वहाँ पर खड़ा हो। सभी अपनें कार्यो में व्यस्त थे, सभी अपना काम उसी तरीके से कर रहे थे जैसे राष्ट्रगान शुरू होने से पहले कर रहे थे। भारतीयों पर इसका कोई असर न देख मेरा मन कुंठा से भर गया। जिस देश में हम रहते है, जहाँ कि रोटी खाते है, जहाँ का पानी पीते है, वहां का सम्मान करना भूल जाते है। परन्तु वास्तविकता तों यही है ?????????

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