भाई का नाम आते ही सभी बहनों मन चहक उठता है। भाई का प्यार ही कुछ ऐसा होता है। मेरा एक छोटा भाई है जो मुझसे पाँच साल छोटा है उसका नाम विवेक है। उसी के लिए आज एक कविता लिखी है। मुझे आज भी वह समय याद है जब मैं बहुत छोटी थी। तब वह हुआ नही था। मैं अकसर अपने मम्मी पापा से कहती थी कि सबके छोटा भाई है मुझे भी एक छोटा भाई खरीद कर लादो। तब वो मुझे बोलते थे कि भाई लाने के लिए बहुत पैसे चाहिए और हमारे पास इतने पैसे नही है। मैं जवाब में अपने मम्मी पापा को कहती थी कि हम सब खाना बन्द कर देते है। और जब पैसे हो जायेगे तब भइया ले आना। और फ़िर एक दिन जब मैं स्कूल से आई तो पापा ने मुझसे कहा हम तुम्हारे लिए भाई लाये है। ये सुनकर पता नही क्या हुआ, मैने पापा से कहा जल्दी से मुझे भाई के पास ले चलो। पापा ने खिचड़ी बनाई और मुझे साईकिल पर बैठा कर हॉस्पिटल ले जाने लगे। मैं अपने पापा से कहती जा रही थी जल्दी चलो। तब ऐसा लग रहा था की उड़ कर चली जाऊ। पर ऐसा तो हो नही सकता था। जब मैने पहली बार अपने भाई को देखा तो बहुत खुश हुई, और तब से साथ खेले साथ बड़े हुए, पर आज दूर हूँ और उसकी बहुत याद आती है।भइया बाट निहारती हूँ तेरी,
नजर रखती हूँ हर पल,
दरवाजे पर
तू आएगा एक दिन
और गले से लग जाएगा मेरे।
भइया बाट निहारती हूँ तेरी,
सोचती हूँ हर पल,
तेरे साथ बिताये हुए लम्हें,
बचपन से जो साथ था तू,
अब क्यूँ दूर है मेरे ?
भइया बाट निहारती हूँ तेरी,
याद करती हूँ हर पल,
तेरे साथ उस झगड़े को,
जो प्यार से करते थे, रुठते थे,
और एक पल में मान जाते थे।
भइया बाट निहारती हूँ तेरी,
खोजती हूँ हर पल,
फ़िर से उन लम्हों को,
तेरी मेरी उन शरारतों को,
तेरे उस निश्चल प्यार को।
एक पल भी मुझे अपने पास न पाकर,
बैचेन हो उठता था मेरे लिए।
भइया बाट निहारती हूँ तेरी,
चाहती हूँ वही हर पल,
तू आजा,
जी लेते है उन फ़िर से उन लम्हों को,
चल फ़िर लौट चलते है बचपन में।
भइया बाट निहारती हूँ तेरी।




16 comments:
man ko chhoo lene wala aalekh likhne ke liye badhai....
भाई बहन का प्यार .....
अच्छी रचना के लिए बधाई
भाई बहन का प्यार बहुत ही प्यारा होता है .बहुत सुंदर लिखा है आपने
is ahsas ko byan karna mushkil hai....bahut pyara lekh.....
बहुत सुंदर लिखा है भावपूर्ण.
आप का लेख बहुत ही प्यारा हे, सब अपना सा लगा, जेसे आप नही यह शवद मे कह रहा हु,कही भी कोई लाग लपेट नही, खिचडी साईकिल सब तो अपने घरो मे ही होता हे,आप का बहुत बहुत धन्यवाद,ओर एक सुन्दर सी कविता इस के लिये भी धन्यवाद
dil chhoo gaya aapka lekh aur kavita dono.
आपने तो मेरी आँखें गीली कर दीं रश्मि जी. भाई बहिन का यह प्यार भारतीय परिवार और समाज की शक्ति है.
दिल को छू लेने वाली भावपूर्न पोस्ट के लिये बधाई.मुझे भी मेरे दोनों भाई बहुत याद आ रहे हैं.
आपने जो मुझे रास्ता दिखाया उसके लिए शुक्रिया...
आपने अपने शब्दों से मेरे बचपन को फिर से मेरी आँखों के आगे ला खड़ा किया...
पढ़कर ऑंखें तो गीली हुईं, लेकिन दिल मैं एक ख़ुशी भी हुयी बचपन के उन बिताये लम्हों को याद कर जब मेरी बहन और मैं साथ खेलते थे...
ऐसे ही लिखती रहें... और ज़िन्दगी के उन लम्हों को करीब लती रहें, जो चले गए हैं...
bahut sundar,
bachpan ki yaden phir se taja ho gai.
जी लेते है उन फ़िर से उन लम्हों को,
चल फ़िर लौट चलते है बचपन में।
अच्छा याद किया है बचपन को
नजर रखती हूँ हर पल,
दरवाजे पर
तू आएगा एक दिन
और गले से लग जाएगा मेरे।
भइया बाट निहारती हूँ तेरी,
"very emotional, liked it"
BAHUT BADHAI HO RASHMI JI
मुक्तक .......
हमारी कोशिशें हैं इस, अंधेरे को मिटाने की
हमारी कोशिशें हैं इस, धरा को जगमगाने की
हमारी आँख ने काफी, बड़ा सा ख्वाब देखा है
हमारी कोशिशें हैं इक, नया सूरज उगाने की ..........
डॉ उदय 'मणि' कौशिक
09414260806
SHRESHTH HINDI KAVITAON , GAZALON , KE LIYE DEKHEN
http://mainsamayhun.blogspot.com
bahut-2 badhai apko is rachna ke liye aur aap behan-bhai ko pyar.
Rashmi ji
Kya behatreen rachna hai man ko seedhe choo liya.....plz read by blog and enjoy some of my haikus. Aap yun hi likhati rahe subhkamnaon ke saath....
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