पर न जाने क्यूँ वीरान है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे लबों की छुअन का,
तेरे लबों की छुअन से,
नया आयाम चाहती है ये पंक्तिया।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बेजान है ये पंक्तिया
इंतजार करती है तेरे सुरों का,
तेरे सुरों से बंधकर,
नया पैगाम चाहती है ये पंक्तिया
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बेराह है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरी राह का,
तेरी राह पर चलकर,
नया जीवन चाहती है ये पंक्तिया।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बेजवाब है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे जवाबों का,
तेरे जवाबों से,
नया निशां चाहती है ये पंक्तिया।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बैचेन है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे पाने का,
तुझे पाकर,
नया सुकून चाहती है ये पंक्तिया,
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया।





17 comments:
पर न जाने क्यूँ बैचेन है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे पाने का,
तुझे पाकर,
नया सुकून चाहती है ये पंक्तिया,
sakoon...
bahut acha...
पर न जाने क्यूँ बैचेन है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे पाने का,
तुझे पाकर,
नया सुकून चाहती है ये पंक्तिया,
nissandeh khoobsurat....
बहुत बढिया!
पर न जाने क्यूँ बेजवाब है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे जवाबों का,
तेरे जवाबों से,
नया निशां चाहती है ये पंक्तिया।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बैचेन है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे पाने का,
तुझे पाकर,
नया सुकून चाहती है ये पंक्तिया,
बहुत सुंदर लिखा है आपने ..
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बेजवाब है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे जवाबों का,
bahut sundar...bahut khoob...likhti rahe.
अद्भुत-बहुत बेहतरीन!!
बहुत उम्दा।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
पर न जाने क्यूँ बेजवाब है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे जवाबों का,
पर न जाने क्यूँ वीरान है ये पंक्तिया,
इंतजार करती है तेरे लबों की छुअन का,
तेरे लबों की छुअन से,
नया आयाम चाहती है ये पंक्तिया।
"kitnee sunder abheevyktee hai, sabon mey byan kerna mushkil hai"
बहुत सुंदर रचना है. एक फ़िल्म आई थी जिस में एक गीत था, 'होठों से छूलो तुम, मेरा गीत अमर कर दो'. आपने तो और नए आयाम दिए इस भावना को.
Rashmi Ji
Ultimate expression of your thinking. keep it up...
तेरे लबों की छुअन से,
नया आयाम चाहती है ये पंक्तिया।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
achha kaha, Badhai
तेरे लबों की छुअन से,
नया आयाम चाहती है ये पंक्तिया।
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया,
achha kaha, Badhai
कोरे कागज पर लिखी है कुछ पंक्तिया। ओर यह पक्तिया बिन बोले ही सब कुछ कहती हे, धन्यवाद
यह बेचैनी ही जीवन है , अच्छा लगा
कितना कुछ बयां कर दिया आपने यहां.बहुत सुन्दर रचना.बहुत बहुत बधाई.
बहुत अच्छी पंक्तिया, बहुत अच्छी प्रस्तुति
shukriya rashmi jee! jab aap hosla badhati hain to mujhe acha lagta hai... main apki salah jarur manunga...
shukriya hoslaa badhane ka...
bahut sara...
or..
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