
क्या ऐसे भी कोई साथ देता है.............
आंखों में आंसू
और
लम्हों में गम का अम्बार देता है।
प्यार के सपने को
पल में बेजार कर देता है।
सीने के घाव को
और कुरेद देता है।
तन को छोड़ देता है,
मेरी रूह को साथ ले जाता है।
क्या ऐसे भी कोई साथ देता है.................




12 comments:
Rashmi ji..
bahut achi rachna hai...
drd se sarabor...
shikayat bhi yun ki hai ki uspe ilzam na aye...
aisi hi hai na...
badhai ho..
मेरी रूह को साथ ले जाता है।
क्या ऐसे भी कोई साथ देता है.................
han koee aisee bhee stah daitta hai, kabhee ankhon mey namee bn kr, kabhee dil mey beklee bn kr, kabhee jindgee mey sanson mey kamee bn kr"
Regards
रश्मि जी बहुत खूबसूरत रचना के लिए बधाई।
बेहतरीन लिखा है आपने
बहुत सुंदर रचना ! बधाई !
मेरी रूह को साथ ले जाता है।
क्या ऐसे भी कोई साथ देता है.................
bahut khoob......
बेहद खूबसूरत...बहुत उम्दा...वाह!
बहुत खूबसूरत रचना बधाई.
बेहतरीन रचना के लिए बधाई।
keep it up.
bahut aacha likha hai
bahut accha laga. kavita aur sangit dono. badhai.
Post a Comment