क्या ये तन्हाई है? कोई कहता है ये रुसवाई है,
जो तुझसे मिलने आई है।
मैं कहती हूँ,
मेरी जिन्दगी तो,
बस एक परछाई है।
धुप में साथ आई है,
छाव में जाने कहाँ समाई है
ढूँढती हूँ पर साथ नहीं,
हर पल मेरे।
शायद यही रुसवाई है,
जो मुझसे मिलने आई है।
क्या ये तन्हाई है?
11 comments:
sahi kaha zindaghi ek parchai hi to hai, jise jitna chuna chaho utni hi dur bhagti hai... bilkul parchai ki tarah..
or mout ki chanv ate hi... sb khatm........
keep it up..
मेरी जिन्दगी तो,
बस एक परछाई है।
धुप में साथ आई है,
छाव में जाने कहाँ समाई है
bahut achchi panktiya...
मेरी जिन्दगी तो,
बस एक परछाई है।
धुप में साथ आई है,
छाव में जाने कहाँ समाई है
ढूँढती हूँ पर साथ नहीं,
very very good mind blowing so keep it up
मेरी जिन्दगी तो,
बस एक परछाई है।
धुप में साथ आई है,
छाव में जाने कहाँ समाई है
बहुत खूब ....
bahut khoob...achcha likha hai.
मेरी जिन्दगी तो,
बस एक परछाई है।
धुप में साथ आई है,
छाव में जाने कहाँ समाई है
"bhut achee manbhan najuk see gazal"
धुप में साथ आई है,
वाह क्या सुन्दरता से हकीकत बयान
की है ! बहुत शुभकामनाएं !
आपके ब्लॉग पर आकर गीत सुनना
बहुत अच्छा लगता है !
वाह कया बात हे...बहुत सुन्दर, धन्यवाद
bhut hi khubsurati se hakikat ko bayan kiya hai. sundar.
मेरी जिन्दगी तो,
बस एक परछाई है।
vah kya baat hai. ati uttam
Bheetar ka dar thoda thoda
achha hai par thoda thoda......
Nirantarta banae rakhiyega........................................................
Post a Comment