Wednesday, June 4, 2008

जागरूकता की रोशनी

आज के समय में बहुत कम व्यक्ति ऐसे है जो जागरूक हैं, लेकिन जो व्यक्ति जागरूक नहीं है उनकीं वजह से असामाजिक तत्व असामाजिकता को बढ़ाते है। और इस असामाजिकता के कारण ही संसार में अपराधों की संख्या बढ़ती ही जा रही है अर्थात् अगर अपराधों को रोकना है तो हर इन्सान को जागरूक होना पड़ेगा।
ऐसे ही जागरुक व्यक्ति के बारे में, मैं आपकों बताती हूँ। बात तो बहुत छोटी है परन्तु जागरूक होना जरुरी है। जब मैं विधि की पढ़ाई कर रही थी, तभी मैने एक वाद पढ़ा था। वह वाद एक प्रोफेसर ने किया था। ये प्रोफेसर उदयपुर राजस्थान के थे। इन्हें एक बार 26 जनवरी पर नया सूट पहनना था, सो इन्होंने समय से कपड़ा लिया और टेलर को सिलने को डाल दिया। उन्होंने टेलर से कहा कि मुझे ये सूट 26 जनवरी को पहनना है, ये बहुत जरुरी है। इसे समय से सिल देना। टेलर ने कहा कि हाँ मैं 26 जनवरी को सुबह सात बजे ये सूट दे दूगा। प्रोफेसर वहाँ से चले गये। जब 26 जनवरी आई तो प्रोफेसर अपना सूट लेने गये तो टेलर ने कहा कि अभी उसमें बटन लगाना व प्रेस करना बाकी है। आप आधे घंटे बाद आइएगा। प्रोफेसर चले गये और आधे घंटे बाद वापस आये परन्तु टेलर ने उन्हें सूट नहीं दिया और कहा कि सूट अभी तैयार नहीं है, आप उसे कल ले जाना। बेचारे प्रोफेसर अपने घर चले गये। उस दिन उन्हें दूसरा सूट ही पहन कर जाना पड़ा। लेकिन कुछ दिन बाद ही टेलर के पास एक लीगल नोटिस आया। वह नोटिस संविदा भंग करने का था अर्थात वो लीगल नोटिस टेलर ने जो सूट समय पर नहीं दिया था उसके लिए था। प्रोफेसर ने टेलर पर वाद कर दिया था, वाद कुछ समय तक चलता रहा और उसका निर्णय प्रोफेसर के पक्ष में हुआ। प्रोफेसर ने अपनी जागरूकता दिखाई इससे लाभ ये हुआ कि अन्य व्यक्ति को जिसे इस तरह की परेशानी हो सकती थी। वह आगे समय के लिए टल गई।
ये तो सिर्फ़ एक छोटी सी बात है। इससे भी बड़ी-बड़ी परेशानियाँ लोगों को अपने जीवन में उठानी पड़ती है। क्योकि वे जागरूक नहीं हैं। और अगर हर इन्सान जागरूक होगा तो वह बहुत हद तक होने वाले अपराधों को कम कर सकता है।
आइये आप भी जागरूक बनिए।

1 comment:

डॉ .अनुराग said...

aise hi hamare samne vale profesar sahab hai ,vo chitthiya bahut likha karte hai ,sabhi vibahgo ko ,sab kai bar majak bhi udate the .lekin jab colony ki sadak bankar taiyaar hui....ab kam se kam log e-mail to kar rahe hai.