"हे परमेश्वर" यदि समुद्र रूपी पात्र में "पहाड़"
जितनी सियाही डाल दी जाए,
कल्प वृक्ष की शाखा को "कलम"
और प्रथ्वी को "कागज" बना लिया जाए
और उस पर "सरस्वती देवी" जीवन भर तुम्हारे गुण लिखती रहे
तो भी उन्हें पूर्ण रूप से नही लिखा जा सकता।
स्त्रोत -: शिव महिम्न




8 comments:
ॐ नमः शिवाय
शिवजी की मोहक तस्वीर के साथ श्लोक का हिन्दी रूपांतरण करके प्रस्तुत करने के लिए आपको साधुवाद.
ॐ नमः शिवाय
जय हो भोले बाबा की!
bahut khubsurat,shiv ji ki stuti mein,badhai
aaj pehlee baar hee apko padha. apkaa andaaze bayan kuchh alag saa ha main to behad prabhaavit hua. achha laga . aapko padhna.
बहुत खूब। ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है।
शिव की महिमा अनंत है.
असित गिरी समंस्यात कज्जलं सिन्धु पात्रे
सुर तरुवर शाखा लेखनी पात्र मुरवी .
लिखित यदि गृहीत्वा शारदा-सर्वकालं
तथपि तव गुणा नामीश पारम न याति !
तभी तो वे कहते हैं नेति-नेति
यानी नयाती- नयाती यानी कि अनंत विस्तार उसका जिसे हम ब्रह्म कहते हैं
सच ब्लाग पर प्रथम बार आध्यात्मिक चर्चा करती ये पोस्ट आपाको शत-शत नमन
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