Sunday, June 15, 2008

ईश्वर [इधर उधर खोजती हूँ तुझे]

रुक-रुक कर चलती हूँ,
कदम ठहर जाते है।
जाने किसका इंतजार है,
जिसके लिए सहम जाती हूँ।
इधर उधर खोजती हूँ तुझे..............
तू कौन है
जिसका इंतजार है मुझे।
तू कहाँ है
जिसे मैं खोजती हूँ हर पल।
लाख खोजा
पर तू ना मिला।
जब खोज कर हार गई.................
तब तू मिल गया।
जिसे खोजा पूरे संसार में
वो तो मेरे मन में मिला।

5 comments:

nadeem said...

बहुत खूब. मोहे कहाँ ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास रे!

Suresh Gupta said...

बिल्कुल सही बात है - "जिसे खोजा पूरे संसार में वो तो मेरे मन में मिला।"

Anonymous said...

baht sundar sahi,ishwar dil mein hi rehte hai,bahut khub

अवनीश एस तिवारी said...

ishwar par likhana apane aap me ek mahan rachnaa hotee hai. Is nek kaam ke liye anek anek badhayee


Avaneesh

Anonymous said...

ईश्वर के प्रति इन लगावों का भावात्मक कारण तो समझ में आता है पर यथार्थ परक व तर्कसंगत कारण समझ में नहीं आता. खैर तस्वीर बहुत अच्छा लगा.