रुक-रुक कर चलती हूँ, कदम ठहर जाते है।
जाने किसका इंतजार है,
जिसके लिए सहम जाती हूँ।
इधर उधर खोजती हूँ तुझे..............
तू कौन है
जिसका इंतजार है मुझे।
तू कहाँ है
जिसे मैं खोजती हूँ हर पल।
लाख खोजा
पर तू ना मिला।
जब खोज कर हार गई.................
तब तू मिल गया।
जिसे खोजा पूरे संसार में
वो तो मेरे मन में मिला।




5 comments:
बहुत खूब. मोहे कहाँ ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास रे!
बिल्कुल सही बात है - "जिसे खोजा पूरे संसार में वो तो मेरे मन में मिला।"
baht sundar sahi,ishwar dil mein hi rehte hai,bahut khub
ishwar par likhana apane aap me ek mahan rachnaa hotee hai. Is nek kaam ke liye anek anek badhayee
Avaneesh
ईश्वर के प्रति इन लगावों का भावात्मक कारण तो समझ में आता है पर यथार्थ परक व तर्कसंगत कारण समझ में नहीं आता. खैर तस्वीर बहुत अच्छा लगा.
Post a Comment