Wednesday, June 11, 2008

हाथों की लकीरों में तुझे ढूँढा...........................

रोशन है जग सारा, तो मेरे मन में अंधेरा क्यों है?
कहीं ये किसी तूफान के आने की आहट तो नहीं...........
डर लगा तो
झांक कर अपनी दोनों हाथों की लकीरों में तुझे ढूँढा................
पर ये क्या देखा,
जिसे कल तक मुट्ठी में बंद किया था, वो कहाँ है????????
क्या ये मन का अंधेरापन तो नहीं............
ये क्या हो रहा है,
इतनी रोशनी में भी सबकुछ इतना धुंधला क्यों है????????
सोचा कि ये बेमुरव्वत सपना है,
मैनें अपनी दोनों आँखे बंद कर ली है
ताकि जब आँख खुले तो सब कुछ ठीक हो...........................................
तब किसी ने जोर से आवाज लगाई रशी.....
आँखे खोली..................
अरे!!!!!!!!!! सब सच है.............
तुम कहाँ चले गए हो?????????????????????????

5 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत खूब!!

तस्वीर कहाँ की है?

Anonymous said...

aapke hathon ki lakirein sada bani rahe aur wo insaan bhi hamesha aapke saath rahe jiski ye lakirein hai,sundar kavita,sundar ehsaas

डॉ .अनुराग said...

bahut khoob....

Unknown said...

बहुत खूब. फोटो भी बहुत सुंदर है.

कुमार मुकुल said...

रश्मि जी वाह आप तो अच्‍छी कविताएं लिखती हैं